गुरूजी का व्याख्यान : # गोवा में 21 और 22 जून को – संपर्क: गव्यसिद्ध डॉ. संदीप सुथर 094 220 57 263. # ग्वालियर में 9 एवं 10 जुलाई को गोविज्ञान कथा एवं चिकित्सा – संपर्क: गव्यसिद्ध डॉ. गोरव गुप्ता 097 1850 5558. # पाटन, गुजरात में 14 – 16 जुलाई तक गोविज्ञान कथा एवं चिकित्सा, संपर्क: गव्यसिद्धाचार्य डॉ. हरेश ठाकर 099 790 55 0 55. # दिवा, पुणे में 22-23 जुलाई (द्वारकाधीश प्राथमिक पंचगव्य प्रशिक्षण केंद्र में चिकित्सा 2 pm से 5 pm तक) संपर्क: गव्यसिद्ध सों ज्ञानेश्वरी 98 237 22 459, # पुणे में 24 जुलाई को गोशाला उद्घाटन एवं चिकित्सा – संपर्क: गव्यसिद्ध सुहाष पाटिल 099 601 95 262 व गव्यसिद्ध श्रीमती पुष्पा गाड़े पाटिल 9765274004. # अलपुझा, केरल (गाँधी स्मारक प्राथमिक पंचगव्य प्रशिक्षण केंद्र) में 25-26 जुलाई को चिकित्सा 2 pm से 5 pm तक. संपर्क: गव्यसिद्ध विनय कृष्णा 949 55 486 73.
चोथा पंचगव्य चिकित्सा महासम्मेलन 19 नवम्बर से 21 नवम्बर 20 16, गुजरात के द्वारिका नगरी में होगा. जो सहयोग करना चाहते हैं, संपर्क करें – गुरूजी 09 444 03 47 23 (7 am से 9 am तक )
शीघ्र शुरू हो रहा है. (1) पंचगव्य मेडिसिन प्रीप्रेसन टेकनोलाजी -2 वर्ष, (2) एडवांस पंचगव्य थेरेपी -2 वर्ष जनवरी 2016 से नामांकन प्रारम्भ केवल 25 सीटें., (3) गर्भधारण-प्रसूति व बालपालन {केवल महिला गव्यसिद्धों के लिए – जनवरी 2016 से नामांकन प्रारम्भ केवल 25 सीटें.}.

भारत और भारतीयतता की स्थापना के इस आन्दोलन में आपका स्वागत

यह अंतर्जाल (वेब साईट) महर्षि वाग्भट्टजी और अमर बलिदानी राजीव भाई दीक्षित को समर्पित है. यहाँ पर अभी सात विभाग हैं. 1) महर्षि वाग्भट्ट गोशाला 2) पंचगव्य गुरुकुलम 3) पंचगव्य उत्पादन केंद्र 4) पंचगव्य अनुसन्धान केंद्र 5) पंचगव्य चिकित्सालय 6) पंचगव्य विश्वविद्यालय और 7) पंचगव्य चिकित्सा महासम्मेलन. ये सभी विभाग स्वावलंबी व्यवस्था में संचालित होते हैं. इसकी स्थापना सर्वप्रथम वर्ष 1999 में अ. ब. राजीव भाई दीक्षित की प्रेरणा और उनके कर कमलों से एक जैविक कृषि केंद्र के रूप में हुई थी. वर्ष भर बाद गोशाला की स्थापना हुई. इसके साथ ही विकाश का क्रम जरी रहा और आज महर्षि वाग्भट्ट गोशाला के पास ही एक नए भूभाग में पंचगव्य विश्वविद्यालय की स्थापना आगामी (9 मई, वर्ष 2016) अक्षयतृतीय को की जा रही है. यह एक गुरुकुलिए विश्वविद्यालय होगा. जो भारतीये पोराणिक तकनीकी ज्ञान को समर्पित गुरुकुलिये विश्व विद्यालय होगा. यहाँ पर पंचगव्य के माध्यम से शल्य चिकित्सा का विकाश, गोमाता के विज्ञान के कई विषयों में विद्यावारिधि (P.hd) तक की पढाई. पंचगव्य मेडिसिन प्रिप्रेशन टेक्नोलॉजी (PMPT गव्य फार्मेशी) एडवांस पंचगव्य थेरेपी, गव्य इंजीनियरिंग एवं टेकनोलाजी एवं गोशाला निर्माण के लिए अलग से सिविल इंजिनीअरिंग आदि की पढाई होगी. हमारे इस अभियान का एक मात्र उद्देश्य भारत को गोमाता से सबल, समृद्ध और स्वावलंबी बनाना है.
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पंचगव्य चिकित्सा महासम्मेलन छायाचित्र, स्वर्ण पदक से सन्मानित गव्यसिद्धर, भारत की गायें, गुरुकुल की वनस्पतियां आदी

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